भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया महिला टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला सिर्फ एक जीत नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि मौजूदा दौर में भारतीय महिला क्रिकेट टीम कितनी परिपक्व और संतुलित हो चुकी है। भारत महिला क्रिकेट टीम ने इस मैच में हर उस कमी को उजागर किया, जिससे टी20 क्रिकेट में कोई भी टीम मैच हार सकती है।
टॉस से ही भारत की सोच साफ दिखी
भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। यह फैसला सिर्फ पिच देखकर नहीं लिया गया था, बल्कि इसके पीछे एक साफ रणनीति थी—श्रीलंका की बल्लेबाजी को शुरुआत में ही दबाव में लाना। भारतीय गेंदबाजों ने इस योजना को मैदान पर पूरी तरह उतार दिया।
पहले ही ओवर से लाइन-लेंथ इतनी सटीक थी कि श्रीलंका की बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका ही नहीं मिला। डॉट बॉल्स ने धीरे-धीरे दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया।
श्रीलंका की पारी: एक खिलाड़ी पर टिकी उम्मीद
श्रीलंका की ओर से कप्तान चमीरा ने जरूर सकारात्मक इरादे दिखाए। उन्होंने कुछ आकर्षक शॉट लगाए और रन गति बढ़ाने की कोशिश की। 24 गेंदों में 31 रन बनाकर वह अच्छी लय में नजर आ रही थीं।
लेकिन जैसे ही स्नेहा राणा ने उन्हें आउट किया, श्रीलंका की पारी की रीढ़ ही टूट गई। इसके बाद बल्लेबाजों का आत्मविश्वास साफ तौर पर डगमगाता दिखा। रन बनाने के बजाय विकेट बचाने की सोच हावी हो गई, जो टी20 फॉर्मेट में अक्सर नुकसानदेह साबित होती है।
नतीजा यह रहा कि श्रीलंका महिला क्रिकेट टीम 20 ओवर खेलने के बावजूद 9 विकेट पर सिर्फ 128 रन ही जोड़ सकी।
भारतीय गेंदबाजी: नाम नहीं, टीम वर्क
इस मैच में भारत की गेंदबाजी का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट यह रहा कि कोई भी गेंदबाज अलग-थलग नहीं दिखा।
- वैष्णवी शर्मा और श्री च्नी ने अहम मौकों पर विकेट निकाले
- श्रेया राणा और क्रांति गौड़ ने रन गति को पूरी तरह बांधकर रखा
- बाकी गेंदबाजों ने अनुशासन नहीं तोड़ा
श्रीलंका की बल्लेबाजी इस दबाव से कभी बाहर ही नहीं आ पाई।
लक्ष्य छोटा था, लेकिन लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
128 रन का लक्ष्य टी20 में आसान जरूर लगता है, लेकिन भारत ने इसे “आसान” समझकर नहीं खेला। शुरुआत से ही भारतीय बल्लेबाजों का इरादा साफ था—मैच को जल्दी खत्म करना।
ओपनिंग जोड़ी ने बिना जोखिम उठाए आक्रामक बल्लेबाजी की। हालांकि स्मृति मंधाना 14 रन बनाकर आउट हो गईं, लेकिन इससे भारत की लय पर कोई असर नहीं पड़ा।
शैफाली वर्मा: टी20 क्रिकेट की परिभाषा
इस मैच की सबसे बड़ी कहानी रही शैफाली वर्मा की बल्लेबाजी। उन्होंने सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि श्रीलंका की गेंदबाजी की धार ही कुंद कर दी।
27 गेंदों में अर्धशतक पूरा करना यह बताता है कि वह टी20 क्रिकेट को कितनी अच्छी तरह समझती हैं। मैदान के हर हिस्से में लगाए गए शॉट्स ने यह साफ कर दिया कि यह मैच अब भारत के हाथ से निकलने वाला नहीं है।
जेमी रोड्रिगस और कप्तान का योगदान
जेमी रोड्रिगस ने छोटी लेकिन बेहद प्रभावशाली पारी खेली। 15 गेंदों में 26 रन बनाकर उन्होंने मैच को एकतरफा कर दिया।
इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर का क्रीज पर आना सिर्फ औपचारिकता नहीं था, बल्कि टीम को मानसिक मजबूती देने जैसा था। उनके रहते भारत की जीत पूरी तरह सुनिश्चित हो गई।
आधे मैच में ही नतीजा तय
10 ओवर के खेल में भारत ने 2 विकेट खोकर 113 रन बना लिए थे। इसके बाद बाकी ओवर सिर्फ आंकड़ों की बात रह गए। आखिरी 10 ओवर में केवल 16 रन बनाने थे, जो भारत ने बेहद आराम से हासिल कर लिए।
सीरीज में 2–0 की बढ़त और बढ़ता आत्मविश्वास
इस जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2–0 की बढ़त बना ली है। यह सिर्फ स्कोरलाइन की बात नहीं है, बल्कि यह बताता है कि भारतीय टीम हर मैच के साथ ज्यादा संगठित और खतरनाक होती जा रही है।
निष्कर्ष
इस मुकाबले ने साफ कर दिया कि:
- भारत की गेंदबाजी अब सिर्फ विकेट नहीं, दबाव बनाना जानती है
- बल्लेबाजी में आक्रामकता और समझदारी का सही संतुलन है
- टीम व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज्यादा सामूहिक जीत पर भरोसा करती है
अगर यही लय बनी रही, तो आने वाले मुकाबलों में भारत को रोकना श्रीलंका के लिए और भी मुश्किल होने वाला है।