भारतीय क्रिकेट में वनडे कप्तानी को लेकर शुभमन गिल पर बढ़ते सवाल
भारतीय क्रिकेट इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ चर्चा सिर्फ रन, औसत या स्ट्राइक रेट की नहीं है। चर्चा है भरोसे की, कंट्रोल की और उस कुर्सी की जिस पर बैठने के लिए अब सिर्फ टैलेंट काफी नहीं रहा। कप्तानी अब नाम से नहीं, स्टेबिलिटी से तय हो रही है।
इस पूरी कहानी की जड़ कप्तानी नहीं बल्कि घरेलू क्रिकेट से निकलती है — विजय हजारे ट्रॉफी से।
विजय हजारे ट्रॉफी: जब दिग्गजों ने सिस्टम को आईना दिखाया
24 दिसंबर को घरेलू क्रिकेट में दो पारियां खेली गईं, लेकिन उनका असर सिर्फ स्कोरकार्ड तक सीमित नहीं रहा।
विराट कोहली की पारी: क्लास की वापसी
दिल्ली की जर्सी में Virat Kohli आंध्र प्रदेश के खिलाफ मैदान पर उतरे।
यह सिर्फ एक घरेलू मैच नहीं था, यह एक मैसेज था।
125 से ऊपर का स्ट्राइक रेट, गैप चुनना, जमीन पर शॉट खेलना और जरूरत पर बाउंड्री — विराट ने दिखाया कि फॉर्म भले चली जाए, क्लास कभी नहीं जाती।
रोहित शर्मा का शतक: शेर अभी ज़िंदा है
दूसरी तरफ मुंबई के मैदान पर Rohit Sharma।
सात साल बाद विजय हजारे ट्रॉफी में वापसी और सिर्फ 62 गेंदों में शतक।
यह उनका लिस्ट-A करियर का 33वां शतक था।
रोहित की यह पारी भी सिर्फ रन नहीं थी, यह याद दिलाने के लिए थी कि अनुभव की कीमत क्या होती है।
इन दोनों पारियों ने एक बात साफ कर दी —
लीडरशिप उम्र या युवा होने से नहीं, दबाव में फैसले लेने से आती है।
असली बहस: वनडे कप्तानी की खामोश उथल-पुथल
अब आते हैं उस मुद्दे पर जो बिना शोर के भारतीय क्रिकेट के भीतर चल रहा है।
वनडे टीम का कप्तान कागज़ों में भले वही हो, लेकिन अंदरखाने कुछ बदल रहा है।
एक तरफ हैं Shubman Gill,
और दूसरी तरफ उभरता नाम — Shreyas Iyer।
शुभमन गिल: भरोसे से सवाल तक का सफर
कुछ समय पहले तक शुभमन गिल भारतीय क्रिकेट के फ्यूचर फेस थे।
टेस्ट कप्तानी, वनडे कप्तानी और टी20 में उपकप्तानी — यह भरोसे का सबसे बड़ा प्रमाण होता है।
लेकिन क्रिकेट में भरोसा स्थायी नहीं होता।
20 दिसंबर 2025 को जब टी20 वर्ल्ड कप 2026 का स्क्वाड घोषित हुआ, तो एक नाम गायब था — शुभमन गिल।
यह सिर्फ टी20 से बाहर होना नहीं था,
यह संकेत था कि मैनेजमेंट अब उन्हें कोर ग्रुप में नहीं देख रहा।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वनडे सीरीज़ ने इस सोच को और मजबूत किया।
तीन मैचों की सीरीज़, सिर्फ एक जीत।
ड्रेसिंग रूम से आई रिपोर्ट्स में कप्तानी को लेकर सवाल उठे —
फैसलों में देरी, मैदान पर जरूरत से ज्यादा शांत रवैया और सीनियर खिलाड़ियों से तालमेल की कमी।
श्रेयस अय्यर: शोर नहीं, संतुलन
श्रेयस अय्यर कभी पोस्टर बॉय नहीं रहे।
ना सोशल मीडिया पर कप्तानी की मांग, ना मीडिया में बड़े बयान।
लेकिन उनका रिकॉर्ड मजबूत है —
घरेलू क्रिकेट में टीम को फाइनल तक ले जाना,
आईपीएल में दबाव वाले मैचों में नेतृत्व,
और सबसे अहम — वनडे क्रिकेट की समझ।
वनडे फॉर्मेट में आक्रामकता से ज्यादा जरूरी होता है
प्लानिंग, गेंदबाज़ी बदलाव और मैच को पढ़ने की क्षमता।
यही वजह है कि पहले उन्हें उपकप्तान बनाया गया और अब कप्तानी की चर्चा तेज हो गई है।
BCCI की सोच: नाम नहीं, स्थिरता
BCCI के अंदरूनी संकेत साफ हैं।
लक्ष्य है 2027 वनडे वर्ल्ड कप और उसके लिए चाहिए एक स्थिर कप्तान।
शुभमन गिल इस समय तीनों फॉर्मेट का दबाव झेल रहे हैं —
टी20 से बाहर, टेस्ट में रन का दबाव और वनडे कप्तानी की जिम्मेदारी।
मैनेजमेंट वही गलती दोहराना नहीं चाहता जो पहले युवा कप्तानों के साथ हुई।
आगे क्या होगा?
अगर बदलाव होता है, तो
श्रेयस अय्यर भारतीय वनडे टीम के 29वें कप्तान बन सकते हैं।
यह कहानी शुभमन गिल के करियर के खत्म होने की नहीं है,
लेकिन यह जरूर दिखाती है कि अब कप्तानी ऑटोमैटिक नहीं मिलती।
आज भारतीय क्रिकेट में कप्तानी मिलती है —
प्रेशर हैंडलिंग, ड्रेसिंग रूम कंट्रोल और स्थिरता पर।
आपकी राय
क्या आपको लगता है कि शुभमन गिल की वनडे कप्तानी खतरे में है?
और क्या श्रेयस अय्यर सही विकल्प साबित होंगे?
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