जब टीम इंडिया ने आखिरी टी20 मुकाबले में साउथ अफ्रीका को 30 रनों से हराया, तो यह सिर्फ एक जीत नहीं थी। यह उस फर्क की कहानी थी जो मजबूत टीम और मजबूर टीम के बीच होता है। जीत दोनों को मिलती है, लेकिन मजबूत टीम इंडिविजुअल चमक से नहीं, सामूहिक कोशिश से जीतती है।
231 रन बनाना आसान नहीं होता, और 201 पर किसी टीम को रोकना उससे भी ज्यादा मुश्किल। खासकर तब, जब पिच बल्लेबाजों के लिए जन्नत जैसी हो। आज की पिच बाकी मुकाबलों से बेहतर थी, रन बनने के लिए तैयार थी, लेकिन फिर भी भारत ने दिखा दिया कि सिर्फ पिच नहीं, किरदार भी मैच जिताते हैं।
तिलक वर्मा… क्या खिलाड़ी है यार। 42 गेंदों में 73 रन। न घबराहट, न जल्दबाज़ी। कभी टिककर, कभी तेज। अलग-अलग पोजीशन पर खुद को ढालना किसी आम बल्लेबाज की बात नहीं होती। तिलक अब भारत की उस ताकत का नाम बन चुके हैं, जो शोर नहीं मचाती लेकिन काम पूरा करती है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ उनका औसत 70 के पार है, और यह कोई इत्तेफाक नहीं है।
और फिर आए हार्दिक पांड्या। 25 गेंदों में 63 रन, जिसमें 16 गेंदों पर 50। बैट से तबाही, बॉल से असर। विकेट भी लिया और मैदान पर वो कॉन्फिडेंस दिखाया जो बड़े मैच विनर्स के पास होता है। हार्दिक पांड्या को देखकर यही लगता है कि ये खिलाड़ी दबाव में और ज्यादा निखरता है। प्यार हो या प्रेशर, हार्दिक दोनों में कमाल कर देता है।
शुरुआत की बात करें तो संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने वही स्टार्ट दी, जिसकी उम्मीद थी। संजू ने 22 गेंदों में 37 रन बनाए, 160 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट के साथ। अच्छी कीपिंग, बढ़िया शॉट सिलेक्शन और मैदान पर मौजूदगी। अगर इतनी परफॉर्मेंस के बाद भी संजू सैमसन को अगली सीरीज में ड्रॉप किया गया, तो यकीन मानिए वो फैसला क्रिकेट से ज्यादा दर्द देगा।
अब मैच का असली टर्निंग पॉइंट। 10 ओवर में साउथ अफ्रीका 118 पर थी। क्विंटन डिकॉक खतरनाक लग रहे थे। ऐसा लग रहा था कि मैच हाथ से निकल रहा है। तभी आए जसप्रीत बुमराह। चार ओवर, सिर्फ 17 रन। और वो एक विकेट—डिकॉक का। उसी पल मैच की दिशा बदल गई। जहां बाकी गेंदबाज पिट रहे थे, वहीं बुमराह मैच को पकड़कर खड़े थे। यही फर्क होता है अच्छे और महान गेंदबाज में।
वरुण चक्रवर्ती पिटे जरूर, 4 ओवर में 53 रन, लेकिन 4 विकेट भी ले गए। इस पिच पर चार विकेट निकालना आसान नहीं होता। स्पिनर का बोल्ड करना, डंडा उड़ाना—वो अलग ही सुकून देता है। वरुण और बुमराह की जोड़ी किसी भी बल्लेबाजी लाइन-अप के लिए एक डरावना सपना है।
साउथ अफ्रीका की बात करें तो डिकॉक और ब्रेविस ने शुरुआती ओवरों में तबाही मचा दी थी। एक वक्त पर लगा कि मैच निकल गया। लेकिन जैसे ही पहला विकेट गिरा, पूरी टीम बिखर गई। 120 पर एक विकेट से 135 पर पांच विकेट—यहीं मजबूत और मजबूर टीम का फर्क साफ दिख गया।
इस मैच की सबसे बड़ी कहानी सिर्फ जीत नहीं थी, बल्कि ये सवाल भी था कि आगे टीम इंडिया किस दिशा में जाएगी। क्या संजू सैमसन को ओपनिंग में लगातार मौके मिलेंगे? क्या कप्तान और उपकप्तान की पोजीशन पर सवाल खड़े हो रहे हैं? सूर्यकुमार यादव कप्तान के तौर पर शानदार रहे हैं, लेकिन खिलाड़ी के तौर पर उनकी फॉर्म चिंता बढ़ा रही है। दो बड़े बवाल एक साथ पालना किसी भी टीम के लिए मुश्किल होता है।
फिलहाल एक बात साफ है—भारत के पास मैच विनर्स की कमी नहीं है। तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, बुमराह, वरुण चक्रवर्ती—हर मैच में कोई न कोई आगे आ रहा है। और यही किसी मजबूत टीम की पहचान होती है।
अंत में बस इतना ही कहना है—
भारत मैच नहीं खेल रहा, भारत मैच कंट्रोल कर रहा है।
और यही मजबूत टीम की असली पहचान है।