ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया और इसके पीछे छुपा अंधेरा सच
ऑनलाइन गेमिंग कैसे एक आम लड़के की ज़िंदगी को करोड़ों की चकाचौंध तक ले गई,
और कैसे वही चमक जांच एजेंसियों तक पहुंच गई —
यह कहानी सिर्फ एक शख्स की नहीं, बल्कि आज के युवाओं की हकीकत है।
बचपन से ही दुबला-पतला एक लड़का।
क्रिकेट खेलने का शौक था, लेकिन खेलने से कहीं ज़्यादा देखने का। दिन हो या रात, टीवी पर मैच चल रहा हो तो वो बिना देखे चैन से बैठ ही नहीं पाता था। क्रिकेट उसकी रग-रग में बसा हुआ था।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, क्रिकेट से ज़्यादा उसका मन ऑनलाइन गेम में लगने लगा। घर वालों को भनक तक नहीं लगी। कभी मम्मी की जेब से पैसे गायब, कभी पापा की, कभी चाचा की। छोटी-छोटी रकम थी, इसलिए किसी ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया। सबको लगा, घर में ही कहीं खर्च हो गए होंगे।
लेकिन एक दिन घर से सोने की चैन चोरी हो जाती है। तलाश शुरू होती है और यहीं पर सच्चाई सामने आती है कि घर का बेटा ऑनलाइन गेम की लत में फंस चुका है। पिता मेडिकल स्टोर चलाते हैं, चाचा की हथियार लाइसेंस की दुकान है। मध्यमवर्गीय परिवार, सीधी-सादी ज़िंदगी।
सबने बैठाकर समझाया। कहा—
“ये ऑनलाइन गेम बहुत खतरनाक हैं। कितने घर बर्बाद हो चुके हैं।”
लड़के ने वादा किया कि अब कभी गेम नहीं खेलेगा।
लेकिन कुछ समय बाद उसने दोस्त से कहा—
“यहाँ मन नहीं लगता, कहीं दूर चलते हैं।”
गांव से सीधा दिल्ली का रुख किया।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के नवाबगंज ब्लॉक के गांव खजूर का रहने वाला यह लड़का था— अनुराग द्विवेदी।
दिल्ली पहुंचकर उसने YouTube चैनल बनाया। बचपन से क्रिकेट की जो समझ थी, वही उसकी ताकत बन गई। खिलाड़ी की कमजोरी, पिच का मिज़ाज, टीम कॉम्बिनेशन—वो हर चीज़ को बारीकी से समझाता था। धीरे-धीरे लोग जुड़ने लगे।
देखते ही देखते YouTube पर करीब 71 लाख सब्सक्राइबर हो गए। Telegram पर 23 लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स और Instagram पर करीब 24 लाख।
Fantasy क्रिकेट का दौर चल रहा था। खासतौर पर Dream11 जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग टीम बनाकर पैसा लगाने लगे। अनुराग को गेम की इतनी समझ थी कि वह लगातार जीतता दिखने लगा।
अपने इंटरव्यू में उसने दावा किया कि उसने ₹300 से शुरुआत की और ₹3 लाख जीते। फिर यही सिलसिला चलता रहा। उसका कहना था कि उसने लगभग ₹52 करोड़ जीते और करीब ₹30 करोड़ की कमाई ऑनलाइन प्रमोशन से की।
अब वही लड़का, जो कभी साइकिल चलाया करता था, BMW, Lamborghini, Mercedes और Thar जैसी गाड़ियों में घूम रहा था। लग्ज़री लाइफ, महंगी घड़ियां, बड़े होटल, बड़े लोग—सब कुछ सोशल मीडिया पर खुलेआम।
फिर आई वो शादी, जिसने सबको चौंका दिया।
22 नवंबर 2025।
100 रिश्तेदारों को शादी का कार्ड मिला। जब कार्ड खोला तो एड्रेस पढ़कर सब हैरान रह गए—दुबई। कार्ड के अंदर आने-जाने के हवाई टिकट भी रखे थे। एयरपोर्ट तक गाड़ी, दुबई में लग्ज़री होटल, शाही इंतज़ाम।
कई रिश्तेदारों ने ज़िंदगी में पहली बार हवाई जहाज देखा। पहली बार विदेश गए। शादी समुद्र के बीच एक क्रूज़ पर हुई। बड़े-बड़े जहाज, आलीशान कमरे, शानदार नज़ारे। सब कुछ किसी सपने जैसा।
शादी के बाद जब लोग गांव लौटे, तो किस्से फैलने लगे। दुबई, क्रूज़, लग्ज़री, करोड़ों की बातें। यही बातें घूमते-घूमते जांच एजेंसियों तक पहुंच गईं।
मामला पहुंचा प्रवर्तन निदेशालय तक।
सवाल सीधा था—
इतना पैसा आया कहां से?
17 दिसंबर 2025 को ED की टीम गांव खजूर, नवाबगंज और लखनऊ में उसके करीब 9 ठिकानों पर पहुंचती है। करीब 17 घंटे तक पूछताछ होती है। परिवार के लोगों से सवाल होते हैं। बैंक अकाउंट फ्रीज़ किए जाते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घर में करीब 10 करोड़ की गाड़ियां खड़ी थीं। दुबई में संपत्ति, लखनऊ में फ्लैट, 100 बीघा ज़मीन, 30 बीघा खेती की ज़मीन पिता के नाम।
इसी दौरान एक और दावा सामने आता है—लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर ₹1 करोड़ की रंगदारी। डर के चलते पुलिस से सुरक्षा मांगी जाती है, बाद में पोस्ट डिलीट हो जाती है।
अब सवाल ये नहीं है कि अनुराग अमीर कैसे बना।
सवाल ये है कि क्या ये सारी कमाई पूरी तरह कानूनी थी या नहीं।
इसका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा।
लेकिन इस कहानी का मकसद किसी को निशाना बनाना नहीं है। मकसद सिर्फ चेतावनी है। ऑनलाइन गेमिंग में लाखों लोग हारते हैं। कुछ गिने-चुने लोग जीतते हैं और वही उदाहरण बन जाते हैं। बाकी लोग कर्ज, तनाव और बर्बादी के रास्ते पर चले जाते हैं।
सपनों की चमक में सच्चाई मत भूलिए।
आप सुरक्षित रहें, आपका परिवार सुरक्षित रहे।
जय हिंद। जय भारत।