असम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन
असम में विकास का उत्सव: गुवाहाटी एयरपोर्ट के नए टर्मिनल से नॉर्थ ईस्ट को नई उड़ान
असम आज केवल एक राज्य नहीं, बल्कि पूरे नॉर्थ ईस्ट के विकास का प्रतीक बनकर उभर रहा है। गुवाहाटी स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल के उद्घाटन के साथ असम के विकास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों से मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाने का आग्रह करते हुए यह संदेश दिया गया कि जब विकास का प्रकाश पहुंचता है, तो ज़िंदगी की हर राह नई ऊँचाइयों को छूने लगती है।
असम से आत्मीय रिश्ता और पूर्वोत्तर के प्रति संकल्प
असम और पूर्वोत्तर की धरती से जुड़ाव, यहां के लोगों का स्नेह और माताओं-बहनों का अपनापन लगातार विकास के संकल्प को मजबूत करता है। आज यह साफ दिखाई देता है कि असम केवल आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि नए कीर्तिमान भी गढ़ रहा है।
भारत रत्न भूपेन हजारिका की पंक्तियाँ—
“लुईर पार जिलिका टूली बोलोई, आमी प्रतिज्ञाबद्ध आमी संकल्पबद्ध”
आज असम की ज़मीनी हकीकत बनती दिखाई दे रही हैं।
डबल इंजन सरकार और निरंतर विकास
जैसे ब्रह्मपुत्र की धाराएँ कभी नहीं रुकतीं, वैसे ही भाजपा की डबल इंजन सरकार में असम में विकास की धारा भी लगातार बह रही है। नए एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन इसी संकल्प का प्रमाण है।
इससे पहले असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोदोलोई की प्रतिमा का अनावरण किया गया—जो आने वाली पीढ़ियों को असम की अस्मिता और स्वाभिमान की प्रेरणा देती रहेगी।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर = नए अवसर
आधुनिक एयरपोर्ट, हाईवे, रेलवे और डिजिटल कनेक्टिविटी किसी भी राज्य के लिए नए अवसरों का प्रवेश द्वार होते हैं।
आज असम में:
- शानदार हाईवे
- आधुनिक एयरपोर्ट
- बेहतर रेलवे नेटवर्क
यह सब देखकर लोगों को लगता है कि अब जाकर असम के साथ न्याय हो रहा है।
कांग्रेस की उपेक्षा बनाम वर्तमान परिवर्तन
दशकों तक असम और नॉर्थ ईस्ट को विकास से दूर रखा गया। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को अनावश्यक बताने वाली सोच ने इस क्षेत्र को पीछे रखा। लेकिन बीते 11 वर्षों में तस्वीर बदली है—लाखों करोड़ की परियोजनाएँ शुरू हुईं और असम विकास की मुख्यधारा में आया।
रिकॉर्ड, रोजगार और संस्कृति
- भारतीय न्याय संहिता लागू करने में असम देश में नंबर-1
- 50 लाख से अधिक स्मार्ट प्री-पेड मीटर
- बिना पर्ची, बिना खर्ची सरकारी नौकरियाँ
- बिहू नृत्य का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (11,000 से अधिक कलाकार)
नया टर्मिनल: विकास भी, विरासत भी
नया एयरपोर्ट टर्मिनल सालाना 1.25 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम है।
इसका डिज़ाइन असम की संस्कृति और प्रकृति से प्रेरित है—
- इंडोर फॉरेस्ट
- हरियाली
- बांस का व्यापक उपयोग
बांस, जो असम के जीवन का अभिन्न हिस्सा है, आज आधुनिक भारत की पहचान भी बन रहा है।
कनेक्टिविटी से बदली तस्वीर
- ब्रह्मपुत्र पर नए मेगा ब्रिज
- वंदे भारत एक्सप्रेस
- जलमार्गों में 140% कार्गो वृद्धि
- गंगा विलास क्रूज़ से ग्लोबल टूरिज्म में एंट्री
असम अब केवल राज्य नहीं, बल्कि भारत का ईस्टर्न गेटवे बन रहा है।
सुरक्षा, पहचान और अस्मिता
जहाँ कभी हिंसा थी, वहाँ आज 4G-5G कनेक्टिविटी है।
अतिक्रमण हटाकर संसाधनों को असम के लोगों के लिए सुरक्षित किया जा रहा है। असम की पहचान और अस्मिता की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
विकसित असम से विकसित भारत
आज दुनिया भारत को नई उम्मीद से देख रही है।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में असम और पूरा नॉर्थ ईस्ट अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
विकसित असम → विकसित नॉर्थ ईस्ट → विकसित भारत
इसी विश्वास और संकल्प के साथ नए टर्मिनल के उद्घाटन पर सभी असमवासियों को बधाई दी गई।