अरावली पर्वतमाला: उत्तर भारत को रेगिस्तान बनने से बचाने वाली सबसे पुरानी ढाल
लगभग 2 बिलियन साल पहले बनी अरावली पर्वतमाला आज सिर्फ पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि उत्तर भारत की जीवन रेखा है। गुजरात से लेकर दिल्ली के रायसीना हिल्स तक फैली लगभग 700 किमी लंबी यह पर्वतमाला सदियों से थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकती आ रही है।
अगर अरावली नहीं होती, तो आज
- दिल्ली, हरियाणा, यूपी और मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से रेगिस्तान बन चुके होते
- ग्राउंड वाटर लेवल और नीचे होता
- एयर पॉल्यूशन आज से कई गुना ज्यादा होता
लेकिन आज वही अरावली सरकारी नीतियों के कारण सबसे बड़े खतरे में है।
🏔️ अरावली क्यों है इतनी ज़रूरी?
अरावली की पहाड़ियां और उन पर मौजूद जंगल:
- रेगिस्तानी हवाओं की स्पीड कम करती हैं
- रेत और धूल को आगे बढ़ने से रोकती हैं
- ग्राउंड वाटर को रीचार्ज करती हैं
- दिल्ली-NCR के लिए ग्रीन लंग्स का काम करती हैं
इसी वजह से अरावली को काटना सिर्फ जंगल काटना नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के भविष्य से खिलवाड़ है।
⚠️ 100 मीटर वाली नई डेफिनेशन: असली खेल यहीं है
मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार से अरावली की एक यूनिफॉर्म डेफिनेशन बनाने को कहा — ताकि माइनिंग रोकी जा सके।
लेकिन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जो डेफिनेशन दी, उसने समस्या हल करने की जगह 90% अरावली को ही गायब कर दिया।
नई डेफिनेशन के अनुसार:
- सिर्फ वही पहाड़ अरावली कहलाएंगे जिनकी ऊंचाई 100 मीटर से ज्यादा होगी
- ऊंचाई सी-लेवल से नहीं, आसपास की जमीन से मापी जाएगी
- 500 मीटर के भीतर दो पहाड़ होंगे तभी उन्हें रेंज माना जाएगा
📉 नतीजा?
राजस्थान में अरावली के 90% से ज्यादा पहाड़ इस क्राइटेरिया में फेल हो जाते हैं।
📊 सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?
Forest Survey of India के अनुसार:
- राजस्थान में अरावली के 1,281 पहाड़
- सिर्फ 8.7% ही 100 मीटर से ऊंचे
यानि कागज़ों में 90% अरावली अब अरावली नहीं रहेगी।
🪨 माइनिंग, रियल एस्टेट और पैसा
अरावली के विनाश के पीछे सबसे बड़ा कारण:
💰 रियल एस्टेट + माइनिंग + कॉर्पोरेट चंदा
- NCR में अरबों की जमीन
- फार्महाउस, रिसॉर्ट्स, वेडिंग वेन्यू
- सिलिका, मार्बल, स्टोन की माइनिंग
यह सब पहले भी अवैध रूप से होता रहा है, और अब कानूनी रास्ता खोला जा रहा है।
🏗️ कांत एन्क्लेव और फार्महाउस इकॉनमी
फरीदाबाद के कांत एन्क्लेव केस में:
- 425 एकड़ अरावली फॉरेस्ट पर अवैध कॉलोनी
- सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में मकान गिराने का आदेश दिया
- खरीदारों में जज, नेता, अधिकारी, क्रिकेटर तक शामिल
यह सब तब हुआ जब अरावली प्रोटेक्टेड थी।
सोचिए, अगर प्रोटेक्शन हट गया तो क्या होगा?
🌫️ दिल्ली की हवा और अरावली का रिश्ता
अरावली में बने 12 बड़े गैप्स:
- थार की रेत सीधे दिल्ली-NCR तक पहुंच रही है
- PM10 और PM2.5 में भारी इज़ाफा
- धूल भरी आंधियां अब आम हो चुकी हैं
क्लाइमेट साइंटिस्ट्स चेतावनी दे चुके हैं:
“अरावली खत्म हुई तो दिल्ली का क्लाइमेट सेमी-डेजर्ट बन जाएगा।”
💧 पानी की लड़ाई भी यहीं हार रहे हैं
- 1 हेक्टेयर अरावली भूमि ≈ 20 लाख लीटर पानी रिचार्ज
- आज ग्राउंड वाटर लेवल 1000–2000 फीट नीचे
- बदखल लेक सूख चुकी
- दमदमा लेक सिर्फ 1/3 रह गई
🧑⚖️ जनता के दबाव से मिली थोड़ी राहत
जनवरी 2025 में:
- देशभर में Save Aravalli आंदोलन
- जयपुर, उदयपुर, गुरुग्राम, दिल्ली में प्रदर्शन
- सोशल मीडिया पर #SaveAravalli ट्रेंड
📌 नतीजा:
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 100 मीटर डेफिनेशन पर अस्थायी रोक लगाई
और एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई।
✊ अब आगे क्या?
यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
अगर दबाव कम हुआ, तो:
- नई माइनिंग लीज़ आएंगी
- जंगल कटेंगे
- रेगिस्तान आगे बढ़ेगा
नो अरावली = नो लाइफ
यह नारा सिर्फ पोस्टर नहीं, हकीकत है